पर्यावरण का होता नुकसान और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण
पर्यावरण प्रदूषण :-
आज वर्तमान समय में मानव की माया की अंधी दौड़ में पर्यावरण का भी नुकसान हो रहा हैं । अंधाधुंध वनों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, कल कारखानों, वाहनों की अधिकता से आज मानव प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा हैं । पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण के कुछ मुख्य प्रकार आज हम पढ़ते हैं :-
1. वायु प्रदूषण :-
वायु में धुएं, अवांछित गैसे, धूल के कणों की उपस्थिति से वायु का दूषित होना ही वायु प्रदूषण हैं।
कल कारखानों की चिमनियों के निकलते धुएं, वाहनों के धुएं, परमाणु संयत्रों से निकलने वाली गैसों, जंगलों के जलने से, कोयलों के जलने से वायु प्रदूषण होता हैं ।
2. जल प्रदूषण :-
जल में उपस्थित अवांछित और खतरनाक तत्वों से जल का प्रदूषित होना, जल प्रदूषण हैं ।
औद्योगिक इकाइयों से कचरा और खराब जल का जल स्रोतों में विसर्जन, गंदे नालों और सीवरों का पानी नदियों में छोड़ना, मानव मल को नदियों में त्यागना, मेडिकल वेस्ट का जल स्रोतों में विसर्जन, कृषि कार्यों के लिए प्रयुक्त रसायनों और कीटनाशकों से आदि कारणों से जल प्रदूषित होता हैं ।
3. भूमि प्रदूषण :-
भूमि पर अवांछित, अनुपयोगी और जहरीले पदार्थों की उपस्थिति से भूमि प्रदूषण होता हैं । औद्योगिक इकाइयों के कचरे से, कृषि में प्रयुक्त रसायनों और कीटनाशकों से, नगरों के कचरे का विसर्जन, मेडिकल वेस्ट आदि से भूमि प्रदूषित होती हैं ।
4. ध्वनि प्रदूषण :-
अत्यधिक तेज, असहनीय और अनियंत्रित ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहा जाता हैं । वाहनों के अत्यधिक हॉर्न और इंजन के शोर से, लाउड स्पीकरो के अनियंत्रित उपयोग से, औद्योगिक इकाइयों के पॉवर सायरन और मशीनों के द्वारा होने वाले शोर आदि से ध्वनि प्रदूषण होता हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण से पर्यावरण और मानव का नुकसान :-
आज ये प्रदूषण अत्यधिक बढ़ गए हैं । पर्यावरण प्रदूषण से वातावरण में दूषित गैसों की अधिकता हो गई है और आक्सीजन की कमी होने लगी हैं। वायु प्रदूषण से श्वास लेने में भी तकलीफ होने लगी हैं । इससे वायुमंडल के ऊपर बनी ओज़ोन परत को भी क्षति पहुंच रही हैं, उसमे छेद हो गए हैं, जिससे सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंच रही हैं । इस कारण त्वचा संबंधी रोग ज्यादा होने लगे हैं ।
जल और भूमि प्रदूषण से पीने के पानी की कमी होने लगी हैं। स्वच्छ पानी बहुत कम रह गया है । भूमि बंजर होने लगी हैं और कृषि योग्य भूमि का अभाव होने लगा है । ध्वनि प्रदूषण से श्रवण संबंधी रोग होने लगे हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण से अम्लीय और क्षारीय वर्षा होती हैं ।
समाधान :-
ये सब मानव की भौतिकतावादी नीति और माया की अंधी दौड़ के कारण हो रहा हैं । जब तक इस भौतिकता का खोखलापन उजागर नहीं होगा और मानव की माया की अंधी दौड़ खत्म नहीं होगी तब तक ये पर्यावरण प्रदूषण कम नहीं होगा ।
अगर मानव को पूर्ण परमात्मा का तत्व ज्ञान हो जाए तो उसकी ये अंधी दौड़ खत्म हो जाएगी और पर्यावरण को महत्व देगा । पूर्ण परमात्मा की सत भक्ति करेंगे तो कोई रोग नहीं होंगे । सभी मानव सत भक्ति करेंगे तो पूरी पृथ्वी हरी भरी और प्रदूषण मुक्त हो जाएगी । समय पर वर्षा होगी । कृषि से अत्यधिक पैदावार हॉजिज जिससे कीटनाशकों और रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । लोग परमात्मा से देने वाले होंगे और प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करेंगे । वृक्षों की कटाई नहीं करेंगे । पूरी पृथ्वी पर बहुत सुंदर माहौल हो जाएगा । सभी मानव सुखी और विकार रहित निर्मल जीवन जिएंगे ।
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अवश्य देखें 👉 साधना टीवी प्रतिदिन 7:30 PM
आज वर्तमान समय में मानव की माया की अंधी दौड़ में पर्यावरण का भी नुकसान हो रहा हैं । अंधाधुंध वनों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, कल कारखानों, वाहनों की अधिकता से आज मानव प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा हैं । पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण के कुछ मुख्य प्रकार आज हम पढ़ते हैं :-
1. वायु प्रदूषण :-
वायु में धुएं, अवांछित गैसे, धूल के कणों की उपस्थिति से वायु का दूषित होना ही वायु प्रदूषण हैं।
कल कारखानों की चिमनियों के निकलते धुएं, वाहनों के धुएं, परमाणु संयत्रों से निकलने वाली गैसों, जंगलों के जलने से, कोयलों के जलने से वायु प्रदूषण होता हैं ।
2. जल प्रदूषण :-
जल में उपस्थित अवांछित और खतरनाक तत्वों से जल का प्रदूषित होना, जल प्रदूषण हैं ।
औद्योगिक इकाइयों से कचरा और खराब जल का जल स्रोतों में विसर्जन, गंदे नालों और सीवरों का पानी नदियों में छोड़ना, मानव मल को नदियों में त्यागना, मेडिकल वेस्ट का जल स्रोतों में विसर्जन, कृषि कार्यों के लिए प्रयुक्त रसायनों और कीटनाशकों से आदि कारणों से जल प्रदूषित होता हैं ।
3. भूमि प्रदूषण :-
भूमि पर अवांछित, अनुपयोगी और जहरीले पदार्थों की उपस्थिति से भूमि प्रदूषण होता हैं । औद्योगिक इकाइयों के कचरे से, कृषि में प्रयुक्त रसायनों और कीटनाशकों से, नगरों के कचरे का विसर्जन, मेडिकल वेस्ट आदि से भूमि प्रदूषित होती हैं ।
4. ध्वनि प्रदूषण :-
अत्यधिक तेज, असहनीय और अनियंत्रित ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहा जाता हैं । वाहनों के अत्यधिक हॉर्न और इंजन के शोर से, लाउड स्पीकरो के अनियंत्रित उपयोग से, औद्योगिक इकाइयों के पॉवर सायरन और मशीनों के द्वारा होने वाले शोर आदि से ध्वनि प्रदूषण होता हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण से पर्यावरण और मानव का नुकसान :-
आज ये प्रदूषण अत्यधिक बढ़ गए हैं । पर्यावरण प्रदूषण से वातावरण में दूषित गैसों की अधिकता हो गई है और आक्सीजन की कमी होने लगी हैं। वायु प्रदूषण से श्वास लेने में भी तकलीफ होने लगी हैं । इससे वायुमंडल के ऊपर बनी ओज़ोन परत को भी क्षति पहुंच रही हैं, उसमे छेद हो गए हैं, जिससे सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंच रही हैं । इस कारण त्वचा संबंधी रोग ज्यादा होने लगे हैं ।
जल और भूमि प्रदूषण से पीने के पानी की कमी होने लगी हैं। स्वच्छ पानी बहुत कम रह गया है । भूमि बंजर होने लगी हैं और कृषि योग्य भूमि का अभाव होने लगा है । ध्वनि प्रदूषण से श्रवण संबंधी रोग होने लगे हैं ।
पर्यावरण प्रदूषण से अम्लीय और क्षारीय वर्षा होती हैं ।
समाधान :-
ये सब मानव की भौतिकतावादी नीति और माया की अंधी दौड़ के कारण हो रहा हैं । जब तक इस भौतिकता का खोखलापन उजागर नहीं होगा और मानव की माया की अंधी दौड़ खत्म नहीं होगी तब तक ये पर्यावरण प्रदूषण कम नहीं होगा ।
अगर मानव को पूर्ण परमात्मा का तत्व ज्ञान हो जाए तो उसकी ये अंधी दौड़ खत्म हो जाएगी और पर्यावरण को महत्व देगा । पूर्ण परमात्मा की सत भक्ति करेंगे तो कोई रोग नहीं होंगे । सभी मानव सत भक्ति करेंगे तो पूरी पृथ्वी हरी भरी और प्रदूषण मुक्त हो जाएगी । समय पर वर्षा होगी । कृषि से अत्यधिक पैदावार हॉजिज जिससे कीटनाशकों और रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । लोग परमात्मा से देने वाले होंगे और प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करेंगे । वृक्षों की कटाई नहीं करेंगे । पूरी पृथ्वी पर बहुत सुंदर माहौल हो जाएगा । सभी मानव सुखी और विकार रहित निर्मल जीवन जिएंगे ।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़े पुस्तक 👉🏻जीने की राह👈🏻 ।
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