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Showing posts from May, 2020

UNTIMELY NATURAL DISASTER

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प्राकृतिक आपदाएं  :- वर्तमान समय में मानव अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति और पर्यावरण को बहुत नुक़सान पहुंचा रहा है । प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर रहा हैं और पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा हैं । जिस कारण जलवायु और मौसम गड़बड़ा गए हैं । तापमान में वृद्धि और असमय मौसम बदल रहा हैं । इसी कारण असमय प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं । मुख्य प्राकृतिक आपदाएं कौन कौनसी हैं :- भूकंप :-  भूकंप पृथ्वी के अंदर होने वाली हलचल हैं, जिससे पृथ्वी फट जाती हैं । भूस्खलन :- पृथ्वी की उपरी परत या पहाड़ों का मलबा अपनी जगह से खिसकना भूस्खलन हैं । ज्वालामुखी विस्फोट :- धरती के गर्भ में मौजूद गर्म मैग्मा अत्यधिक ताप के कारण विस्फोट के रूप के लावा के रूप में पृथ्वी के बाहर आता हैं । ये ही ज्वालामुखी विस्फोट हैं । बाढ़ :- अत्यधिक बारिश के कारण नगरो, गांवों, खेतों में अत्यधिक जल बाढ़ के रूप में होता हैं । सुखा (अकाल) :- बारिश बिल्कुल नहीं होती हैं या बहुत कम होती हैं, जिससे सुखा (अकाल) पड़ता हैं । सुनामी (चक्रवाती तूफ़ान) :- समुद्र में अत्यधिक तेज गति के साथ तूफ़ान का...

पर्यावरण का होता नुकसान और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण

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पर्यावरण प्रदूषण  :- आज वर्तमान समय में मानव की माया की अंधी दौड़ में पर्यावरण का भी नुकसान हो रहा हैं । अंधाधुंध वनों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, कल कारखानों, वाहनों की अधिकता से आज मानव प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा हैं । पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा हैं ।   पर्यावरण प्रदूषण के कुछ मुख्य प्रकार आज हम पढ़ते हैं :- 1. वायु प्रदूषण  :- वायु में धुएं, अवांछित गैसे, धूल के कणों की उपस्थिति से वायु का दूषित होना ही वायु प्रदूषण हैं।   कल कारखानों की चिमनियों के निकलते धुएं, वाहनों के धुएं, परमाणु संयत्रों से निकलने वाली गैसों, जंगलों के जलने से, कोयलों के जलने से वायु प्रदूषण होता हैं । 2. जल प्रदूषण  :- जल में उपस्थित अवांछित और खतरनाक तत्वों से जल का प्रदूषित होना, जल प्रदूषण हैं । औद्योगिक इकाइयों से कचरा और खराब जल का जल स्रोतों में विसर्जन, गंदे नालों और सीवरों का पानी नदियों में छोड़ना, मानव मल को नदियों में त्यागना, मेडिकल वेस्ट का जल स्रोतों में विसर्जन, कृषि कार्यों के लिए प्रयुक्त रसायनों और कीटनाशकों से आदि कारणों से जल प्रद...

नास्तिकता और गलत साधना दोनों ही मानव जीवन के लिए घातक हैं ।

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नास्तिकता :- नास्तिकता का अर्थ है - किसी भी भगवान को ना मानना और भक्ति साधना को व्यर्थ समझना । नास्तिक व्यक्ति मानता है कि कोई भगवान नहीं है । प्रकृति से ये सब अपने आप बनता है और नष्ट होता है । भक्ति साधना व्यर्थ है । आध्यात्मिक को बिल्कुल नहीं मानता है ।  गलत (शास्त्रविरुद्ध) साधना :- गलत साधना अर्थात् शास्त्रविरुद्ध साधना अपना मनमाना आचरण होता है । जो किसी भी शास्त्र में प्रमाणित नहीं होता है । लोग लोकवेद ( सुनी सुनाई बातों ) के आधार से मनमानी साधना करने लग जाते हैं । नास्तिकता और गलत साधना का समाधान :- नास्तिक लोग ये सोचते हैं कि ये सृष्टि अपने आप बनी है और अपने आप चल रही है, इसका कोई कर्ता नहीं है ।  एक विचारणीय बात है कि जब कोई देश राजा के बिना नहीं चल सकता है तो ये पूरी सृष्टि बिना परमात्मा के कैसे चल सकती हैं । वास्तविकता ये है कि परमात्मा ने ही ये सृष्टि रची है और इसको चला रहा है।  ये लोक गलत हैं, हम दूसरे सनातन परम धाम (शाश्वत स्थान) में रहते थे । जिसका वर्णन गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में हैं । वहा कोई दुःख नहीं है। वहा जन...